नदी मद की भूमि पर निर्माण को लेकर उठे सवाल, नगर निगम की कार्यशैली पर नागरिकों ने जताई नाराजगी

रायगढ़। नगर निगम द्वारा नदी मद की भूमि पर किए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों से नगर निगम जनता के धन से ऐसे निर्माण कार्य कराता रहा है, जिनका भविष्य अधर में लटक जाता है और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि का उचित उपयोग नहीं हो पाता।

आलोचकों का कहना है कि नगर निगम में सरकारें, महापौर और आयुक्त बदलते रहे हैं, लेकिन कार्यशैली में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। उन्होंने पूर्व में किए गए कई निर्माण कार्यों का हवाला देते हुए कहा कि नदी मद की भूमि पर बनाए गए कई प्रोजेक्ट आज भी अधूरे या अनुपयोगी स्थिति में हैं।

24 दुकानों का निर्माण आज भी विवादों में

बताया जाता है कि पूर्व में निर्दलीय महापौर मधुबाई के कार्यकाल में नदी मद की भूमि पर लगभग 24 दुकानों का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। आरोप है कि आवश्यक अनुमतियों के अभाव में यह परियोजना पूरी तरह मूर्त रूप नहीं ले सकी और आज अधिकांश संरचनाएं उपयोग से बाहर हैं। वहीं कई लोगों की राशि भी दुकान आवंटन की उम्मीद में फंसी हुई बताई जाती है।

चौपाटी परियोजना भी अधूरी

इसके बाद कांग्रेस शासनकाल में तत्कालीन महापौर जानकी काटजू के कार्यकाल में राजघाट के समीप चौपाटी निर्माण परियोजना शुरू की गई थी। इस कार्य के लिए लगभग डेढ़ से दो करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना भी अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हो सकी और इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पाया।

नए निर्माण कार्यों पर भी उठ रहे प्रश्न

वर्तमान में प्रगति नगर, शनि मंदिर क्षेत्र, खर्राघाट और पंजरी प्लांट की ओर रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। इन परियोजनाओं को लेकर भी नागरिकों के बीच चर्चा है कि क्या ये कार्य पूर्ण रूप से साकार हो पाएंगे या पूर्व परियोजनाओं की तरह अधूरे रह जाएंगे।

नदी मद की भूमि पर अधिकार को लेकर सवाल

मुख्य प्रश्न यह उठाया जा रहा है कि नदी मद की भूमि पर निर्माण कार्य कराने के लिए क्या नगर निगम को विधिवत आधिपत्य या स्वीकृति प्राप्त है। कुछ समय पूर्व प्रगति नगर मरीन ड्राइव परियोजना के दौरान नदी से पानी लेने के दौरान मिक्सर मशीन ऑपरेटर की मौत के बाद भी यह मुद्दा चर्चा में आया था।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य नदी मद की भूमि पर किए जा रहे हैं, तो संबंधित विभागों से प्राप्त स्वीकृतियों और अधिकारों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांतियां न रहें।

पारदर्शिता की मांग

शहर के नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि नदी मद की भूमि पर संचालित सभी परियोजनाओं की वैधानिक स्थिति, स्वीकृतियां और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही पूर्व में अधूरी या विवादित परियोजनाओं की भी समीक्षा कर जनता को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाए।

हालांकि इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित अभिलेखों, स्वीकृतियों और विभागीय दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

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